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Thursday, 2 May 2013

गब्बर सिंह का चरित्र चित्रण,

at 01:07

मशहूर फिल्म शोले का गब्बर तो याद ही होगा, उसके जीने का ढंग बड़ा सरल था. 
 
वह नृत्य-संगीत का बहुत शौकीन था: 'महबूबा ओये महबूबा' गीत के समय उसके कोमल ह्रदय का परिचय मिलता है। अन्य डाकुओं की तरह उसका ह्रदय कठोर नहीं था। 
 
वह जीवन में नृत्य-संगीत एवं कला के महत्व को समझता था। 
 
बसंती को पकड़ने के बाद उसके मन का नृत्यप्रेमी फिर से जाग उठा था। उसने बसंती के अंदर छुपी नर्तकी को एक पल में पहचान लिया था। 
 
गौरतलब है कि कला के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त करने का वह कोई अवसर नहीं छोड़ता था..!!! 

मशहूर फिल्म शोले का गब्बर तो याद ही होगा, उसके जीने का ढंग बड़ा सरल था. 


पुराने और मैले कपड़े, बढ़ी हुई दाढ़ी, महीनों से जंग खाते दांत और पहाड़ों पर खानाबदोश जीवन, जैसे मध्यकालीन भारत का फकीरे हो, 


जीवन में अपने लक्ष्य की और इतना समर्पित कि ऐशो-आराम और बिलासिता के लिए एक पल की भी फुर्सत नहीं.



विचारों में उत्कुष्टता के क्या कहने! जो डर गया, सो मर गया - जैसे संवादों से उसने जीवन की क्षणभंगुरता पर प्रकाश डाला था..!!! 


देखा कितना सरीफ है हमारा गब्बर..। 



दयालु इतना की आप भी शरमा जाए.. ठाहुर ने उसे अपने हाथों से पकड़ा था, इसलिए गब्बर ने ठाकुर के सिर्फ हाथों को सजा दी. अगर वो चाहता तो गर्दन भी काट सकता था. पर उसके ममता पूर्ण ह्रदय ने उसे ऐसा करने से रोक दिया..!!!


देखा कितना सरीफ है हमारा गब्बर..।


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