15 अगस्त
यौमे आजादी पर राष्ट्रीय गीत से बढ़कर और क्या हो सकता है.
लिहाजा आज डॉक्टर इकबाल का लिखा हुआ राष्ट्रीय गीत ही गुनगुना लिया जाये.और अपने
वतन भारत से अपनी मोहब्बत का इजहार कर लिया जाये.
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा
हम बुलबुलें है इस की, यह गुलसितां हमारा
ग़ुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में
समझो वहीं हमें भी, दिल हैं जहाँ हमारा
परबत वोह सब से ऊँचा, हमसाया आसमान का
वोह संतरी हमारा, वोह पासबाँ हमारा
गोदी में खेलती हैं इस की हजारों नदिया
गुलशन है जिन के दम से, रश्क-ऐ-जनां हमारा
ऐ आबरुदे गंगा, वोह दिन
है याद तुझको
उतरा तेरे किनारे, जब कारवां
हमारा
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिंदी हैं हम वतन है, हिन्दोस्तान हमारा
यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रोमा, सब मिट गए जहाँ से
बाकी रहा है अब तक,नामो निशाँ हमारा.
कुछ बात है की हस्ती, मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ऐ-जमाँ हमारा
इकबाल कोई महरम, अपना
नहीं जहाँ में
मालूम क्या किसी को, दर्द-ऐ-निहां हमारा
अल्लामा डॉक्टर इकबाल (मरहूम)